चलना ही जिंदगी हैं
चलते चलते अब थक गया हूँ
इसलिए बैठ गया हूँ
क्या चलना ही जिंदगी हैं
हाँ चलना ही जिंदगी हैं
क्या चाँद थकता हैंक्या सितारे थकते हैंक्या सूरज थकता हैं
तुम भी अजीब हो कहाँ मैं कहाँ सूरज कहाँ ये चाँदकहा ये सितारे और कहा हम बिलकुल थके हारे
अरे वही तो सूरज जो सोचले मैं थक गया हूँ तो अँधेरा हो जायेगा
चाँद अगर निकलना बंद कर दे तो खूबसूरती की शायरियां अधूरी रह जाएँगी
और सितारे अगर टीम टिमाना बंद करदे तो
पत्निया पतियों को बोलेंगी जाओ जाओ अमरुद ही तोड़ लाओ पेड़ से
तो सोचोसोच से हैं दुनिया सारी
सोचने से हैं दुनिया हारीये
जो मन हैं जो हमें थकता हैं
ये जो मन हैं जो पकता हैं
बस एक बार अपनी सोच बदल मेरे यार
बड़े प्यार से अपने मन को अपना बना यार
थकान को फूँक मार के उड़ा और अपनी जीत का परचम लहराहाँ
सही हैं चलना ही जिंदगी हैं
तुम भी सितारे बन कर चमकोगे जब तुम चलते चलोगे
Sunday, September 20, 2009
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